उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jin dinon dil se teri yaad juDi rahti thi

जिन दिनों दिल से तिरी याद जुड़ी रहती थी

جن دنوں دل سے تری یاد جڑی رہتی تھی

शायर: Usama Asar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिन दिनों दिल से तिरी याद जुड़ी रहती थी
मेरी हर रात सितारों से भरी रहती थी

एक साया भी भटकता था गली में शब भर
एक खिड़की भी बहुत देर खुली रहती थी

बा'द में 'इश्क़ ने रस्ता भी दिखाया हम को
अव्वल अव्वल बड़ी बे-राह-रवी रहती थी

जिन दिनों सब्र की तल्क़ीन पे लिखता था मैं
एक बुढ़िया मिरी चौखट पे खड़ी रहती थी

याद है आज भी वो मिलना-मिलाना अपना
मेरी झोली तिरे फूलों से भरी रहती थी

खिड़कियाँ खोल दीं इक रोज़ तिरी यादों की
बड़ी सुनसान 'असर' दिल की गली रहती थी