उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is liye lagta hun KHush-bash hazin ho kar bhi

इस लिए लगता हूँ ख़ुश-बाश हज़ीं हो कर भी

اس لیے لگتا ہوں خوش باش حزیں ہو کر بھی

शायर: Usama Asar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस लिए लगता हूँ ख़ुश-बाश हज़ीं हो कर भी
साथ रहता है कोई साथ नहीं हो कर भी

तेरा ए'ज़ाज़-ए-मोहब्बत था कि तेरे बीमार
शहर में छाए रहे गोशा-नशीं हो कर भी

एक बंदे के न होने से ये दुनिया सारी
ज़हर लगती है मुझे इतनी हसीं हो कर भी

बेबसी कहिए इसे या मिरी क़िस्मत कहिए
मैं तुझे पा न सका तेरे क़रीं हो कर भी

हाए वो लोग जो हर एक मुसीबत में 'असर'
साथ देते हैं मिरा ज़ेर-ए-ज़मीं हो कर भी