उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jhuka sake na mujhe hadse mohabbat ke

झुका सके न मुझे हादसे मोहब्बत के

جھکا سکے نہ مجھے حادثے محبت کے

शायर: Hafeez Shahid9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

झुका सके न मुझे हादसे मोहब्बत के
वही हूँ मैं तो वही सिलसिले मोहब्बत के

ये और बात कि तुम ही ने इम्तिहाँ न लिया
सबक़ तो याद थे सारे मुझे मोहब्बत के

तलाश कर उन्हें अहराम-ए-मिस्र की सूरत
हैं दश्त-ए-दिल में कई मक़बरे मोहब्बत के

बताऊँ मैं तुझे अंजाम-ए-आरज़ू कैसे
बना रहा हूँ अभी ज़ाइचे मोहब्बत के

हवा ये कैसी चली है सर-ए-दयार-ए-वफ़ा
बुझे बुझे हैं दिलों में दिए मोहब्बत के

न जाने कैसे मराहिल हैं उस जगह दरपेश
रुके हुए हैं जहाँ क़ाफ़िले मोहब्बत के

रह-ए-वफ़ा में क़दम देख भाल कर रखना
कुछ इतने सहल नहीं रास्ते मोहब्बत के

कशाकश-ए-ग़म-ए-दुनिया से किस को फ़ुर्सत है
करूँ मैं किस से यहाँ मशवरे मोहब्बत के

ज़रा सा भी मुझे ख़ौफ़-ए-ख़िज़ाँ नहीं 'शाहिद'
महक रहे हैं अभी गुल-कदे मोहब्बत के