उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jaisa hun jis haal mein hun achchha hun main

जैसा हूँ जिस हाल में हूँ अच्छा हूँ मैं

جیسا ہوں جس حال میں ہوں اچھا ہوں میں

शायर: Nadeem Bhabha6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जैसा हूँ जिस हाल में हूँ अच्छा हूँ मैं
तुम ने ज़िंदा समझा तो ज़िंदा हूँ मैं

इक आवाज़ के आते ही मर जाऊँगा
इक आवाज़ के सुनने को ज़िंदा हूँ मैं

खुले हुए दरवाज़े दस्तक भूल चुके
इन्दर आ जाओ पहचान चुका हूँ मैं

और कोई पहचान मिरी बनती ही नहीं
जानते हैं सब लोग कि बस तेरा हूँ मैं

जाने किस को राज़ी करना है मुझ को
जाने किस की ख़ातिर नाच रहा हूँ मैं

अब तो ये भी याद नहीं कि मोहब्बत में
कब से तेरे पास हूँ और कितना हूँ मैं