उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab use gardish-e-ayyam ne mara hoga

जब उसे गर्दिश-ए-अय्याम ने मारा होगा

جب اسے گردش ایام نے مارا ہوگا

शायर: Om Prakash Laghar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब उसे गर्दिश-ए-अय्याम ने मारा होगा
ऐ मुसीबत में किसे उस ने पुकारा होगा

अज़्म-ओ-हिम्मत ही से क़िस्मत को सँवारा जाए
एक मौला है तो किस किस का सहारा होगा

सू-ए-कश्ती जो ये तूफ़ान बढ़ा आता है
अज़्म-ओ-हिम्मत के लिए उस में किनारा होगा

फूल तो फूल हैं काँटों से लिपट जाता हूँ
ये समझ कर कि मुझे तेरा नज़ारा होगा

अब न साहिल की तलब है न किनारों की तलाश
डूब जाएँगे जहाँ वो ही किनारा होगा

मैं भला तेरा पता दैर-ओ-हरम से पूछूँ
जज़्बा-ए-इश्क़ को ये कैसे गवारा होगा

तुम तो पज़मुर्दा ग़म-ए-ख़ार में हो ऐ 'लाग़र'
फूल मुरझाए तो क्या हाल तुम्हारा होगा