उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab kabhi KHubi-e-qismat se tujhe dekhte hain

जब कभी ख़ूबी-ए-क़िस्मत से तुझे देखते हैं

جب کبھی خوبیٔ قسمت سے تجھے دیکھتے ہیں

शायर: Parveen Shakir7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब कभी ख़ूबी-ए-क़िस्मत से तुझे देखते हैं
आइना-ख़ाने की हैरत से तुझे देखते हैं

वो जो पामाल-ए-ज़माना हैं मिरे तख़्त-नशीं
देख तो कैसी मोहब्बत से तुझे देखते हैं

कासा-ए-दीद में बस एक झलक का सिक्का
हम फ़क़ीरों की क़नाअ'त से तुझे देखते हैं

तेरे जाने का ख़याल आता है घर से जिस दम
दर-ओ-दीवार की हसरत से तुझे देखते हैं

तेरे कूचे में चले जाते हैं क़ासिद बन कर
और अक्सर उसी सूरत से तुझे देखते हैं

कह गई बाद-ए-सबा आज तिरे कान में क्या
फूल किस दर्जा शरारत से तुझे देखते हैं

तुझ को क्या 'इल्म तुझे हारने वाले कुछ लोग
किस क़दर सख़्त नदामत से तुझे देखते हैं