उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jaane kis saniha-e-dard ke ghammaz rahe

जाने किस सानिहा-ए-दर्द के ग़म्माज़ रहे

جانے کس سانحۂ درد کے غماز رہے

शायर: Lutf-ur-rahman5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जाने किस सानिहा-ए-दर्द के ग़म्माज़ रहे
अहद-दर-अहद बिखरती हुई आवाज़ रहे

गुम हुई जाती है तारीक ख़लाओं में नज़र
इस घड़ी मेरे सिरहाने मिरा दम-साज़ रहे

अपनी पहचान ही खो बैठे हैं रफ़्ता रफ़्ता
अपने ही आप से कितने नज़र-अंदाज़ रहे

ना-रसाई का ये दुख भी तो मुकम्मल न हुआ
हम तिरे रब्त में आग़ाज़ ही आग़ाज़ रहे

आ के वापस न गया कोई हवा का झोंका
टूटते लम्हों में एहसास के दर बाज़ रहे