उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jaane diye ne bola kya

जाने दिए ने बोला क्या

جانے دئے نے بولا کیا

शायर: Fahmi Badayuni9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जाने दिए ने बोला क्या
और हवा ने समझा क्या

पैदा कर इंकार कोई
ख़ाली शोर-शराबा क्या

जिस के लिए पर्वाज़ न हो
ऐसा आब-ओ-दाना क्या

तोड़ दिया लुटने के बा'द
दरवाज़े का होता क्या

किस मतलब के ‘अर्ज़-ओ-तूल
आब नहीं तो दरिया क्या

दूर तलक नीला आकाश
इतना बड़ा भी पर्दा क्या

हम भी मिट्टी तुम भी राख
तेज़ हवा का शिकवा क्या

उस की गली में आ गए काम
और हमारा होता क्या

अफ़ज़ल है दिल की बेगार
'इश्क़ में घाटा-वाटा क्या