उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ittifaqan mile the wo sar-e-rah

इत्तिफ़ाक़न मिले थे वो सर-ए-राह

اتفاقاً ملے تھے وہ سر راہ

शायर: Raaz Muradabadi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इत्तिफ़ाक़न मिले थे वो सर-ए-राह
फिर न उट्ठी किसी तरफ़ भी निगाह

है तबस्सुम बजाए ख़ुद इक आह
ऐ ग़म-ए-आशिक़ी ख़ुदा की पनाह

ग़म उठाता हूँ शुक्र करता हूँ
इश्क़-ए-बेचारगी ख़ुदा की पनाह

ज़िंदगी इस क़दर ज़लील न कर
अब वो मिलते भी हैं तो बर-सर-ए-राह

बे-तअल्लुक़ भी हैं वो मुझ से 'राज़'
मेरी बर्बादियों पे भी है निगाह