उर्दू शायरी · ग़ज़ल

itna chup-chap talluq pe zawal aaya tha

इतना चुप-चाप तअल्लुक़ पे ज़वाल आया था

اتنا چپ چاپ تعلق پہ زوال آیا تھا

शायर: Lutf-ur-rahman5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इतना चुप-चाप तअल्लुक़ पे ज़वाल आया था
दिल ही रोया था न चेहरे पे मलाल आया था

सुब्ह-दम मुझ को न पहचान सका आईना
मैं शब-ए-ग़म की मसाफ़त से निढाल आया था

फिर टपकती रही सीने पे ये शबनम कैसी
याद आई न कभी तेरा ख़याल आया था

कहकशाँ मेरे दरीचों में उतर आई थी
मेरे साग़र में तिरा अक्स-ए-जमाल आया था

अब न वो ज़ौक़-ए-वफ़ा है न मिज़ाज-ए-ग़म है
हू-ब-हू गरचे कोई तेरी मिसाल आया था