उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ishq mein KHud husn-e-ghaarat-gar luTa

'इश्क़ में ख़ुद हुस्न-ए-ग़ारत-गर लुटा

عشق میں خود حسن غارت گر لٹا

शायर: Zaheen Shah Taji6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'इश्क़ में ख़ुद हुस्न-ए-ग़ारत-गर लुटा
लूटने वाला यहाँ आकर लुटा

था दिल-ए-बर्बाद में आबाद कौन
लूटने वाले ये किस का घर लुटा

नक़्द-ए-दीन-ओ-नक़्द-ए-ईमाँ नक़्द-ए-दिल
पास जो कुछ हो लुटा उन पर लुटा

बुल-हवस थे 'अक़्ल के सरमाया-दार
'इश्क़ में नादार ही अक्सर लुटा

थी मोहब्बत ही वो राह-ए-पुर-ख़तर
साथ रह-रौ के जहाँ रहबर लुटा

लूटने वालों का शिकवा कुछ नहीं
अपने हाथों ही 'ज़हीन' अक्सर लुटा