उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ishq majzub hai diwana hai

'इश्क़ मज्ज़ूब है दीवाना है

عشق مجذوب ہے دیوانہ ہے

शायर: Zaheen Shah Taji5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'इश्क़ मज्ज़ूब है दीवाना है
'अक़्ल से होश से बेगाना है

न कहीं घर न कहीं दर उस का
शहर है बाग़ है वीराना है

कहीं साग़र है न मीना न सुबू
मस्त है साहब-ए-मय-ख़ाना है

तालिब-ए-जल्वा-ए-जानाँ भी नहीं
आप ही जल्वा-ए-जानाना है

हफ़्तुम-इक़्लीम में सुल्तान है वो
और अंदाज़ फ़क़ीराना है