उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is tarah dil ko be-asra chhoD kar

इस तरह दिल को बे-आसरा छोड़ कर

اس طرح دل کو بے آسرا چھوڑ کر

शायर: Pandit Vidya Ratan Aasi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस तरह दिल को बे-आसरा छोड़ कर
हम कहाँ जाएँ दर आप का छोड़ कर

क्या भरोसा मरीज़-ए-ग़म-ए-इश्क़ का
कुछ दुआ कीजिए अब दवा छोड़ कर

यूँ भी होता है अपनों से बद-ज़न कोई
यूँ भी जाता है कोई भला छोड़ कर

मौज-ए-तूफ़ाँ ने बढ़ कर सहारा दिया
चल दिया जब मुझे नाख़ुदा छोड़ कर

बादा-ख़ाने में रुस्वाइयाँ ही सही
कौन जाए ये रंगीं फ़ज़ा छोड़ कर

मुद्दतों याद करता रहेगा जहाँ
मिट चले हम तो नक़्शा-ए-वफ़ा छोड़ कर

अहल-ए-दुनिया ने 'आसी' बहुत कुछ दिया
एक जिंस-ए-ख़ुलूस-ओ-वफ़ा छोड़ कर