उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is tarah bebasi ne ghera tha

इस तरह बेबसी ने घेरा था

اس طرح بے بسی نے گھیرا تھا

शायर: Obaidullah Abdi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस तरह बेबसी ने घेरा था
मेरी क़िस्मत मिरा वडेरा था

फिर रिवायात से बग़ावत की
फिर मिरी सुब्ह में अंधेरा था

हिज्र की धूप में हम ऐसों का
पेड़ के साए में बसेरा था

दिल पे दस्तक दी रात भर 'अबदी'
और वो समझी कोई लुटेरा था