उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is shahr mein nishana-e-qatil hami to hain

इस शहर में निशाना-ए-क़ातिल हमी तो हैं

اس شہر میں نشانۂ قاتل ہمی تو ہیں

शायर: Hafeez Shahid9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस शहर में निशाना-ए-क़ातिल हमी तो हैं
कुछ जाबिरों की राह में हाइल हमी तो हैं

जो बेचने चले हैं मता-ए-बहार को
उन दुश्मनों के मद्द-ए-मुक़ाबिल हमी तो हैं

गुल-कारी-ए-चमन में हमारा लहू भी है
रंगीनी-ए-बहार में शामिल हमी तो हैं

जो दौलत-ए-हुनर के तलबगार हैं अभी
ऐ रब्ब-ए-हर्फ़-ओ-सौत वसाएल हमी तो हैं

जो खो गए हैं पेच-ओ-ख़म-ए-रहगुज़ार में
उन सब के मुंतज़िर सर-ए-मंज़िल हमी तो हैं

इक उम्र से हैं हल्क़ा-ए-गिर्दाब में घिरे
ना-आश्ना-ए-क़ुर्बत-ए-साहिल हमी तो हैं

हम ही से है ये रौनक़-ए-बज़्म-ए-हयात भी
इस कारोबार-ए-वक़्त का हासिल हमी तो हैं

उस ने अता किया है ग़म-ए-दो-जहाँ हमें
उस की नवाज़िशात के क़ाबिल हमी तो हैं

हम-राहयान-ए-जादा-ए-दुनिया से क्या गिला
'शाहिद' ख़ुद अपनी ज़ात से ग़ाफ़िल हमी तो हैं