उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is qadar aandhiyon se Darta hai

इस क़दर आँधियों से डरता है

اس قدر آندھیوں سے ڈرتا ہے

शायर: Fahmi Badayuni8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस क़दर आँधियों से डरता है
वो क़फ़स में उड़ान भरता है

उस से कुछ भी नहीं छुपाते हम
वो हमारा 'इलाज करता है

कोई तो पेड़ की जड़ों में है
जो फलों में मिठास भरता है

ख़त्म ये ज़िंदगी नहीं होती
आदमी ता-हयात मरता है

लाख ज़ीने बनाओ लेकिन चाँद
टूटी छत पर नहीं उतरता है

इतने तारे कहाँ से आते हैं
आसमाँ पर ये क्या बिखरता है

रोज़ बतलाता हूँ चराग़ों को
कितनी मुश्किल से दिन गुज़रता है

तान रक्खी है इस तरह गर्दन
जैसे हम से भी कोई डरता है