उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is liye har taraf andhera hai

इस लिए हर तरफ़ अंधेरा है

اس لیے ہر طرف اندھیرا ہے

शायर: Qamar Saqi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस लिए हर तरफ़ अंधेरा है
इस इलाक़े का चाँद बूढ़ा है

ऐ ख़लाओं में चीख़ने वाले
तू मिरी ख़ामुशी का बेटा है

ऐ हसीं सब्ज़ जिस्म के मालिक
ये बता फूल कब महकता है

तुम 'क़मर' जिस में डूब जाते हो
उस समुंदर में एक रस्ता है