उर्दू शायरी · ग़ज़ल

had mohabbat ki par bhi kar li

हद मोहब्बत की पार भी कर ली

حد محبت کی پار بھی کر لی

शायर: Qamar Saqi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हद मोहब्बत की पार भी कर ली
और फिर ख़ुद पे शाइरी कर ली

उस क़नाअत-पसंद से मिल कर
मेरे ग़ुस्से ने ख़ुद-कुशी कर ली

हिज्र का एक पल भी सह न सका
उस के ऑफ़िस में नौकरी कर ली

नींद को आँख पर लपेट लिया
और फिर रात की घड़ी कर ली