उर्दू शायरी · ग़ज़ल

imtiyaz-e-besh-o-kam se dur hai

इम्तियाज़-ए-बेश-ओ-कम से दूर है

امتیاز بیش و کم سے دور ہے

शायर: Pandit Vidya Ratan Aasi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इम्तियाज़-ए-बेश-ओ-कम से दूर है
दिल मोहब्बत के नशे में चूर है

ग़म उठा कर भी बड़ा मसरूर है
किस क़दर सादा दिल-ए-रंजूर है

एक मुश्त-ए-ख़ाक है उस का वजूद
आदमी किस बात पर मग़रूर है

उस के आगे एक भी चलती नहीं
दिल के हाथों हर कोई मजबूर है

हुस्न को गो नाज़ है ख़ुद पर मगर
इश्क़ भी अपनी जगह मग़रूर है

हज़रत-ए-'आसी' की बाबत क्या कहें
शाइ'र अच्छा है मगर मग़रूर है