उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek qabile se hain lekin rang-o-naqsha aur hai

इक क़बीले से हैं लेकिन रंग-ओ-नक़्शा और है

اک قبیلے سے ہیں لیکن رنگ و نقشہ اور ہے

शायर: Hafeez Shahid8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक क़बीले से हैं लेकिन रंग-ओ-नक़्शा और है
और है काँटों की दुनिया गुल की दुनिया और है

इश्तिराक-ए-फ़िक्र हो कैसे हमारे दरमियाँ
तेरी ख़्वाहिश और है मेरी तमन्ना और है

और ही मंज़र है दुनिया का सर-ए-तूर-ए-नज़र
चश्म-ए-दिल के सामने लेकिन तमाशा और है

आरज़ू के बहर-ओ-दरिया की कहानी क्या कहूँ
इस का साहिल और है इस का किनारा और है

देखना तूफ़ान में घिर कर न रह जाए कहीं
नाख़ुदा ये आरज़ुओं का सफ़ीना और है

अब बदलना ही पड़ेगा ये तरीक़-ए-ज़िंदगी
अब मिरी जाँ सूरत-ए-हालात-ए-दुनिया और है

दुश्मनों का हाथ इस में है न यारों का क़ुसूर
इन्क़िता-ए-दोस्ती का शाख़साना और है

ज़िंदगी के मोड़ पर 'शाहिद' मिलें फिर किस तरह
उस का रस्ता मुख़्तलिफ़ है मेरा रस्ता और है