उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hujum dekh ke rasta nahin badalte hum

हुजूम देख के रस्ता नहीं बदलते हम

ہجوم دیکھ کے رستہ نہیں بدلتے ہم

शायर: Habib Jalib4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हुजूम देख के रस्ता नहीं बदलते हम
किसी के डर से तक़ाज़ा नहीं बदलते हम

हज़ार ज़ेर-ए-क़दम रास्ता हो ख़ारों का
जो चल पड़ें तो इरादा नहीं बदलते हम

इसी लिए तो नहीं मो'तबर ज़माने में
कि रंग-ए-सूरत-ए-दुनिया नहीं बदलते हम

हवा को देख के 'जालिब' मिसाल-ए-हम-अस्राँ
बजा ये ज़ोम हमारा नहीं बदलते हम