उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hijr ki mat kaTne ke liye

हिज्र की मात काटने के लिए

ہجر کی مات کاٹنے کے لئے

शायर: Fahmi Badayuni8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हिज्र की मात काटने के लिए
कुछ तो हो रात काटने के लिए

तेरी मेरी छतें बनाता हूँ
अपनी बरसात काटने के लिए

जल्दी जल्दी गुज़ारता हूँ दिन
हिज्र की रात काटने के लिए

उस ने कल रात ख़ूब बातें कीं
मेरी इक बात काटने के लिए

कुछ न कुछ ढूँडता ही रहता हूँ
रात-भर रात काटने के लिए

कोई रिश्ता बहुत ज़रूरी है
ज़ात से ज़ात काटने के लिए

कौन इस झोंपड़ी में आएगा
वो भी बरसात काटने के लिए

उस ने भेजी हैं छतरियाँ नक़ली
असली बरसात काटने के लिए