उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hijr ki dhup mein chaon jaisi baaten karte hain

हिज्र की धूप में छाओं जैसी बातें करते हैं

ہجر کی دھوپ میں چھاؤں جیسی باتیں کرتے ہیں

शायर: Iftikhar Arif6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हिज्र की धूप में छाओं जैसी बातें करते हैं
आँसू भी तो माओं जैसी बातें करते हैं

रस्ता देखने वाली आँखों के अनहोने-ख़्वाब
प्यास में भी दरियाओं जैसी बातें करते हैं

ख़ुद को बिखरते देखते हैं कुछ कर नहीं पाते हैं
फिर भी लोग ख़ुदाओं जैसी बातें करते हैं

एक ज़रा सी जोत के बल पर अँधियारों से बैर
पागल दिए हवाओं जैसी बातें करते हैं

रंग से ख़ुशबूओं का नाता टूटता जाता है
फूल से लोग ख़िज़ाओं जैसी बातें करते हैं

हम ने चुप रहने का अहद किया है और कम-ज़र्फ़
हम से सुख़न-आराओं जैसी बातें करते हैं