उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har tabiat ko jahan pyar bhari KHu kahiye

हर तबीअ'त को जहाँ प्यार भरी ख़ू कहिए

ہر طبیعت کو جہاں پیار بھری خو کہیے

शायर: Qaisar Haideri Dehlvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर तबीअ'त को जहाँ प्यार भरी ख़ू कहिए
कौन से फूल को उस बाग़ की ख़ुशबू कहिए

दूर तक भी कोई सहरा है न गुलशन न क़याम
रहबर-ए-शौक़ को आगाह-ए-मन-ओ-तू कहिए

हम अभी दिल में तुझे ढूँडने से क़ासिर हैं
ये अलग बात कि जल्वे तिरे हर सू कहिए

आज की रात किसी बात का शिकवा क्यों हो
आप कहिए कभी तुम कहिए कभी तू कहिए

एक मेहराब सी मस्जिद की नज़र आती है
मौज-ए-मय कहिए कि अंगड़ाई कि अबरू कहिए

इस्तिफ़ादा है ये अशआ'र नहीं हैं 'क़ैसर'
शाना-ए-'मीर' पे बिखरे हुए गेसू कहिए