उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har qadam ek hadisa hai mujhe

हर क़दम एक हादिसा है मुझे

ہر قدم ایک حادثہ ہے مجھے

शायर: Habiba Ikram6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर क़दम एक हादिसा है मुझे
सिर्फ़ तेरा ही आसरा है मुझे

मेरे क़दमों के नीचे जन्नत है
अपनी औक़ात का पता है मुझे

वज्द में काएनात है सारी
कौन आवाज़ दे रहा है मुझे

इस से पहले कि हो ख़ता कोई
कोई अंदर से रोकता है मुझे

धड़कनें हो गई हैं बे-क़ाबू
किस का एहसास छू गया है मुझे

ज़िंदगी तेरा शुक्रिया तू ने
जीने का हौसला दिया है मुझे