उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil mein wo aan base yun ki nikale na gae

दिल में वो आन बसे यूँ कि निकाले न गए

دل میں وہ آن بسے یوں کہ نکالے نہ گئے

शायर: Habiba Ikram4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल में वो आन बसे यूँ कि निकाले न गए
हम से जज़्बात मोहब्बत में सँभाले न गए

लम्हे भर को नज़र आए थे मगर आज तलक
रूह सरशार है आँखों के उजाले न गए

यूँ मो'अत्तर हुआ एहसास कि इक 'उम्र हुई
मेरी तहरीर से ख़ुशबू के हवाले न गए

किस क़दर दिल पे गिराँ होते हैं पूछे न कोई
ऐसे एहसास जो अल्फ़ाज़ में ढाले न गए