उर्दू शायरी · ग़ज़ल

be-sabab aankh ashk-bar nahin

बे-सबब आँख अश्क-बार नहीं

بے سبب آنکھ اشک بار نہیں

शायर: Habiba Ikram6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बे-सबब आँख अश्क-बार नहीं
तेरी नज़रों में अब वो प्यार नहीं

काश ऐसा भी कोई गुलशन हो
सिर्फ़ ग़ुंचे हों जिस में ख़ार नहीं

आज इज़हार-ए-हाल करने दो
अब हमें दिल पे इख़्तियार नहीं

जिस को देखो वही तड़पता है
'इश्क़ में कौन बे-क़रार नहीं

खो गए राह देखने वाले
अब किसी को भी इंतिज़ार नहीं

बे-हिस-ओ-बे-वफ़ा है ये दुनिया
और तू भी वफ़ा शि'आर नहीं