उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har nafas taza musibat umr bhar dekha kiye

हर नफ़स ताज़ा मुसीबत उम्र भर देखा किए

ہر نفس تازہ مصیبت عمر بھر دیکھا کیے

शायर: Qaisar Haideri Dehlvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर नफ़स ताज़ा मुसीबत उम्र भर देखा किए
देखने की शय न थी दुनिया मगर देखा किए

जिस क़यामत से डराता भी है डरता भी है शैख़
ठोकरों में आप की शाम-ओ-सहर देखा किए

तुम तो आसूदा शब-ए-वा'दा थे ख़्वाब-ए-नाज़ में
शब से ले कर सुब्ह तक हम सू-ए-दर देखा किए

बरहमी उन की अदू के ज़ुल्म गर्दूं के सितम
ये तो देखो आफ़तें हम किस क़दर देखा किए

अल्लाह अल्लाह किस क़दर था नाज़ उन की दीद पर
गाहे-गाहे ख़ुद को भी हम इक नज़र देखा किए

आप ही इक हर तरफ़ जल्वा-नुमा थे बे-हिजाब
आप को देखा किए और उम्र भर देखा किए

हम को हर सज्दा था 'क़ैसर' ताज-ए-शाही से सिवा
सर की क़ीमत आस्तान-ए-दोस्त पर देखा किए