उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har-gam par the shams-o-qamar us dayar mein

हर-गाम पर थे शम्स-ओ-क़मर उस दयार में

ہر گام پر تھے شمس و قمر اس دیار میں

शायर: Habib Jalib6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर-गाम पर थे शम्स-ओ-क़मर उस दयार में
कितने हसीं थे शाम-ओ-सहर उस दयार में

वो बाग़ वो बहार वो दरिया वो सब्ज़ा-ज़ार
नश्शों से खेलती थी नज़र उस दयार में

आसान था सफ़र कि हर इक रहगुज़ार पर
मिलते थे साया-दार शजर उस दयार में

हर-चंद थी वहाँ भी ख़िज़ाँ की उदास धूप
दिल पर नहीं था ग़म का असर उस दयार में

महसूस हो रहा था सितारे हैं गर्द-ए-राह
हम थे हज़ार ख़ाक-बसर उस दयार में

'जालिब' यहाँ तो बात गरेबाँ तक आ गई
रखते थे सिर्फ़ चाक-जिगर उस दयार में