उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har bar usi shaKHs ko kyon yaad karen hum

हर बार उसी शख़्स को क्यों याद करें हम

ہر بار اسی شخص کو کیوں یاد کریں ہم

शायर: Deenbandhu Jaiswal4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर बार उसी शख़्स को क्यों याद करें हम
ऐ दिल तुझे यूँ बारहा नाशाद करें हम

बेचैन रहे शाम-ओ-सहर कोई परिंदा
फिर क्यों न क़फ़स से इसे आज़ाद करें हम

आता नहीं है जब हमें इस हाल पे रोना
फिर दर्द नया क्यों नहीं ईजाद करें हम

हम को न शिकायत कोई है ज़िंदगी तुम से
कुछ तुम ने किया कुछ चलो बर्बाद करें हम