उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aarzu ab ghaT rahi hai baqi to sab Thik hai

आरज़ू अब घट रही है बाक़ी तो सब ठीक है

آرزو اب گھٹ رہی ہے باقی تو سب ٹھیک ہے

शायर: Deenbandhu Jaiswal5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आरज़ू अब घट रही है बाक़ी तो सब ठीक है
ज़ीस्त कुछ यूँ कट रही है बाक़ी तो सब ठीक है

लब रहे हैं मुस्कुराते आंधियों के बीच भी
माथे पे सिलवट रही है बाक़ी तो सब ठीक है

क्या सितम है सिर्फ़ हम को ज़िंदगी को छोड़ के
हर किसी से सट रही है बाक़ी तो सब ठीक है

दिन निकलता है मिरा दुश्वारियों से जंग में
रात इक करवट रही है बाक़ी तो सब ठीक है

मुफ़लिसी से हम को यारो इतना सा है बस गिला
दुनिया हम से कट रही है बाक़ी तो सब ठीक है