उर्दू शायरी · ग़ज़ल

falak se KHwab ka har ek sitara chhin leti hai

फ़लक से ख़्वाब का हर इक सितारा छीन लेती है

فلک سے خواب کا ہر اک ستارا چھین لیتی ہے

शायर: Deenbandhu Jaiswal4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फ़लक से ख़्वाब का हर इक सितारा छीन लेती है
कि ज़िम्मेदारी ये बचपन हमारा छीन लेती है

भला हर डूबते का साथ देती है कहाँ क़िस्मत
कभी तिनके तलक का भी सहारा छीन लेती है

मियाँ ये क़र्ज़ का दरिया बहुत ही जान-लेवा है
अगर जो इस में उतरे तो किनारा छीन लेती है

हमें इस ज़िंदगी से बन्धू इतनी सी शिकायत है
कि क्यों जब आँख देती है नज़ारा छीन लेती है