उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum us gali ka baDa ehtiram karte hain

हम उस गली का बड़ा एहतिराम करते हैं

ہم اس گلی کا بڑا احترام کرتے ہیں

शायर: Qamar Jalalvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम उस गली का बड़ा एहतिराम करते हैं
कि जो भी मिलता है उस को सलाम करते हैं

जनाब-ए-शैख़ ये मय-ख़ाना और ये वा'ज़-ए-तवील
हुज़ूर काहे को पीना हराम करते हैं

इलाही उन की समझ में बयान-ए-ग़म आ जाए
ज़बाँ ख़मोश है आँसू कलाम करते हैं

ख़ुदा ही जाने अब आदाब-ए-बंदगी क्या हों
जिन्हें कि सज्दे हैं लाज़िम कलाम करते हैं

'अजीब होता है महफ़िल में उन का रू-ए-सुख़न
हर इक समझता है मुझ से कलाम करते हैं

'क़मर' हिलाल समझ कर जो देखते हैं मुझे
गले तो मिल नहीं सकते सलाम करते हैं