उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum turbat-e-bosida se murdar nikalen

हम तुर्बत-ए-बोसीदा से मुर्दार निकालें

ہم تربت بوسیدہ سے مردار نکالیں

शायर: Iftikhar Haidar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम तुर्बत-ए-बोसीदा से मुर्दार निकालें
औरों की ज़मीनों से जो अशआर निकालें

पिट जाता है पढ़ते ही सर-ए-बज़्म वो शहकार
आप अपने तईं जैसा भी शहकार निकालें

जाँ-कावी है ये काम नहीं आप के बस का
अशआर नहीं शाम का अख़बार निकालें

खुल जाएगा सारा ही भरम ख़ुश-सुख़नी का
महफ़िल से ज़रा हाशिया-बरदार निकालें

अल्फ़ाज़ के नश्तर ने जिगर चीर दिया है
बेहतर है ज़बाँ रोक के तलवार निकालें