उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum tere gham ke pas baiThe the

हम तिरे ग़म के पास बैठे थे

ہم ترے غم کے پاس بیٹھے تھے

शायर: Fahmi Badayuni7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम तिरे ग़म के पास बैठे थे
दूसरे ग़म उदास बैठे थे

बस वही इम्तिहाँ में पास हुए
जो तिरे आस-पास बैठे थे

शाह को भा गई थी इक दासी
सब मुसाहिब उदास बैठे थे

आँधी आई तो इंकिशाफ़ हुआ
कुर्सियों पर लिबास बैठे थे

बाम-ओ-दर को नहीं दिखाई दिए
तुम हमारे ही पास बैठे थे

आज था बादशाह का तीजा
क़ब्र पर सिर्फ़ दास बैठे थे

दोस्तों ने हँसा दिया आ कर
अच्छे-ख़ासे उदास बैठे थे