उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum par jo hans raha tha wo roya hua sa hai

हम पर जो हँस रहा था वो रोया हुआ सा है

ہم پر جو ہنس رہا تھا وہ رویا ہوا سا ہے

शायर: Zafar Kaleem4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम पर जो हँस रहा था वो रोया हुआ सा है
शायद कि उस के साथ भी धोका हुआ सा है

कल तक कि जिस के नाम से सजती थीं महफ़िलें
तन्हाइयों में आज वो खोया हुआ सा है

बदले बदलते वक़्त ने हालात क्या मिरे
हर शख़्स का मिज़ाज ही बदला हुआ सा है

मुमकिन अगर हो कोई नया ज़ख़्म दीजिए
जो ज़ख़्म भी है जैसे पुराना हुआ सा है