उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baat mehndi se lahu tak aa gai

बात मेहंदी से लहू तक आ गई

بات مہندی سے لہو تک آ گئی

शायर: Zafar Kaleem6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बात मेहंदी से लहू तक आ गई
गुफ़्तुगू अब तुम से तू तक आ गई

अब वो शग़्ल-ए-चाक-दामानी कहाँ
अब तबीअ'त तो रफ़ू तक आ गई

जान जाए यार है अब डर नहीं
बात अपनी आबरू तक आ गई

आरज़ू थी जिस को पाने की हमें
जुस्तुजू उस आरज़ू तक आ गई

बूटे बूटे से नुमायाँ है बहार
डाली डाली रंग-ओ-बू तक आ गई

वस्ल की शब और इतनी मुख़्तसर
बातों बातों में वुज़ू तक आ गई