उर्दू शायरी · ग़ज़ल

humne khiDki mein jaan biTha li hai

हम ने खिड़की में जाँ बिठा ली है

ہم نے کھڑکی میں جاں بٹھا لی ہے

शायर: Fahmi Badayuni9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम ने खिड़की में जाँ बिठा ली है
उस की आवाज़ आने वाली है

हम को ताला नज़र नहीं आता
उस के दर पर नज़र जमा ली है

अब किसी बज़्म में न बोलेंगे
उस गली में सदा लगा ली है

रख दिए हैं चराग़ खिड़की में
और घर में हवा चला ली है

हम तो सय्याद हैं हमारे लिए
तू ही गुलशन है तू ही माली है

मुझ से टूटी हुई छतों ने कहा
यार बरसात आने वाली है

उस के कूचे में नाच आए हैं
सारे दिन की थकन मिटा ली है

पिंजरे बनते हैं शह्र में मेरे
इस लिए आसमान ख़ाली है

ख़ाक में भी मिलाएँगे फ़िलहाल
ज़िंदगी 'इश्क़ में मिला ली है