उर्दू शायरी · ग़ज़ल

humne is dhup se aman ke liye

हम ने इस धूप से अमाँ के लिए

ہم نے اس دھوپ سے اماں کے لئے

शायर: Sabahat Urooj8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम ने इस धूप से अमाँ के लिए
जिस्म ताने हैं साएबाँ के लिए

आँख मंज़र से आश्ना ही नहीं
लफ़्ज़ ढूँडे हैं फिर ज़बाँ के लिए

मुझ पे फेंके गए थे जो पत्थर
मैं ने रक्खे हैं वो मकाँ के लिए

ख़ुद-फ़रेबी तो अब नहीं मुमकिन
ख़्वाब देखे हैं बस जहाँ के लिए

हम जो भेजे गए हैं दुनिया में
एक ता'ना हैं आसमाँ के लिए

कोई ख़्वाहिश अधूरी रह जाए
कोई हीला हो अब फ़ुग़ाँ के लिए

जिन की मंज़िल उन्हें मयस्सर हो
वो निकलते हैं फिर कहाँ के लिए

हम उदासी की इक शबीह हैं अब
इस्तिआ'रा हैं हम ख़िज़ाँ के लिए