उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum ko rasta bata ke lauT gae

हम को रस्ता बता के लौट गए

ہم کو رستہ بتا کے لوٹ گئے

शायर: Fahmi Badayuni6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम को रस्ता बता के लौट गए
हम-सफ़र मुस्कुरा के लौट गए

वो जो कहते थे घर बनाएँगे
सिर्फ़ नक़्शा बना के लौट गए

रात भर आँधियाँ चलीं घर में
तुम तो पर्दे हिला के लौट गए

नब्ज़ पर उँगलियाँ नहीं रक्खीं
सब दवाएँ बता के लौट गए

जो ख़ुदा से मिलाने आए थे
वो ख़ुदा से डरा के लौट गए

होंठ तो हिल रहे थे रात उन के
क्या पता क्या बता के लौट गए