उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum ishq ke safar mein sarabon mein kho gae

हम 'इश्क़ के सफ़र में सराबों में खो गए

ہم عشق کے سفر میں سرابوں میں کھو گئے

शायर: Laeeq Akbar Sahaab8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम 'इश्क़ के सफ़र में सराबों में खो गए
राह-ए-जुनूँ पे चल के ख़राबों में खो गए

कुछ फूल सज गए हैं मोहब्बत की सेज पर
मुरझा के चंद फूल किताबों में खो गए

प्यासी है गर ज़मीन तो प्यासा है आसमाँ
बारिश के क़तरे तिश्ना सहाबों में खो गए

शीरीं लबों से जाने वो क्या बोलता रहा
हम नीम-वा लबों के गुलाबों में खो गए

पैमाने भर के जब दिए साक़ी ने बे-हिजाब
मुर्शिद मुरीद पीर शराबों में खो गए

देता रहा जवाब वो हर इक सवाल का
सारे सवाल उस के जवाबों में खो गए

माँ की दु'आएँ आफ़तों को टालती रहीं
माँ से बिछड़ के सख़्त 'अज़ाबों में खो गए

दिन भर ख़याल-ए-यार में तुम गुम रहे 'सहाब'
ढलते ही रात यार के ख़्वाबों में खो गए