उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum bhi sunte jo tere husn ke charche hote

हम भी सुनते जो तिरे हुस्न के चर्चे होते

ہم بھی سنتے جو ترے حسن کے چرچے ہوتے

शायर: Baldev singh Hamdam6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम भी सुनते जो तिरे हुस्न के चर्चे होते
काश उस वक़्त तिरी बज़्म में बैठे होते

दिल के वो दाग़ जो सीने में छुपा रक्खे हैं
ऐ मसीहा वो कभी तू ने भी देखे होते

हम समझ ही न सके तेरी नज़र का मफ़्हूम
वर्ना यूँ बुत से बने राह में बैठे होते

ग़म-ए-दौराँ की कड़ी धूप ये तपता सहरा
काश दो-गाम तिरी ज़ुल्फ़ के साए होते

हम जला लेते अगर तेरी मोहब्बत के चराग़
इन अँधेरों की जगह दिल में उजाले होते

दिल में होता न कभी ज़ौक़-ए-तजस्सुस का हुजूम
तुझ से दुनिया में अगर और भी चेहरे होते