उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hairan hain sare aaine mazi-o-haal ke

हैराँ हैं सारे आईने माज़ी-ओ-हाल के

حیراں ہیں سارے آئینے ماضی و حال کے

शायर: Qadir Siddiqi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हैराँ हैं सारे आईने माज़ी-ओ-हाल के
जल्वे बिखर गए हैं ये किस ख़ुश-जमाल के

उस बद-गुमाँ की होंगी न कम बद-गुमानियाँ
हम चाहे रख दें अपना कलेजा निकाल के

दुनिया से बे-नियाज़ हूँ ख़ुद से भी बे-ख़बर
क्या क्या करम हैं मुझ पे ग़म-ए-ला-ज़वाल के

लिल्लाह दिल की बात पे पर्दा न डालिए
अस्बाब कुछ तो होंगे ज़रूर इस मलाल के

उन की तलाश में मैं वहाँ तक निकल गया
कटते हैं पर जिस औज पे वहम-ओ-ख़याल के