उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hasil hamein bhi qurbaten thi aap ki kabhi

हासिल हमें भी क़ुर्बतें थी आप की कभी

حاصل ہمیں بھی قربتیں تھی آپ کی کبھی

शायर: Pandit Vidya Ratan Aasi11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हासिल हमें भी क़ुर्बतें थी आप की कभी
या'नी हमें भी रास थी ये ज़िंदगी कभी

हम भी ब-नाम-ए-दोस्ती खाते रहे फ़रेब
हम पर भी था ये आलम-ए-दीवानगी कभी

हम भी थे कामयाब मोहब्बत में दोस्तो
हम पर भी या'नी वो निगह-ए-लुत्फ़ थी कभी

पहरों किसी की याद में खोए रहे हैं हम
ग़म-हा-ए-ज़िंदगी से जो फ़ुर्सत मिली कभी

हम और उन से शिकवा-ए-ज़ोर-ओ-सितम ग़लत
मजबूर हो गए हैं सो वो भी कभी कभी

उन से बिछड़ के उम्र-भर देते रहे फ़रेब
हम ज़िंदगी को और हमें ज़िंदगी कभी

वो और मेहरबान मिरे हाल-ए-ज़ार पर
क्या क्या कमाल करते हैं ये लोग भी कभी

अपनी तबाहियों का उड़ाया है ख़ुद मज़ाक़
ख़ुद क़हक़हे लगाए हैं हम ने कभी कभी

ख़ुद से फ़रार चाहने वाले मुझे भी देख
हर सख़्ती-ए-हयात सही उफ़ न की कभी

मायूस इस क़दर भी नहीं ज़िंदगी से हम
ज़िंदा रहे तो रास भी आ जाएगी कभी

'आसी' तमाम उम्र रहीं आह-ओ-ज़ारियाँ
देखी न तेरे होंटों पे हम ने हँसी कभी