उर्दू शायरी · ग़ज़ल

haalat-e-haal mein aadab nahin bhulta main

हालत-ए-हाल में आदाब नहीं भूलता मैं

حالت حال میں آداب نہیں بھولتا میں

शायर: Nadeem Bhabha5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हालत-ए-हाल में आदाब नहीं भूलता मैं
ख़ुद को भूलूँ भी तो अहबाब नहीं भूलता मैं

मैं अभी इश्क़ नहीं हालत-ए-ईमान में हूँ
जंग करते हुए अस्बाब नहीं भूलता मैं

जज़्ब करती हुई ख़िल्क़त से मोहब्बत है मुझे
चाँद को छोड़िए तालाब नहीं भूलता मैं

ऐ मुझे ख़्वाब दिखाते हुए लोगो सुन लो
मेरा दुख ये है कोई ख़्वाब नहीं भूलता मैं

पारसाई नहीं तन्हाई मयस्सर थी वहाँ
सो तिरे मिम्बर-ओ-मेहराब नहीं भूलता मैं