उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hae re ahd-e-guzishta ki karam-farmaiyan

हाए रे अहद-ए-गुज़िश्ता की करम-फ़रमाइयाँ

ہائے رے عہد گزشتہ کی کرم فرمائیاں

शायर: Qadir Siddiqi10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हाए रे अहद-ए-गुज़िश्ता की करम-फ़रमाइयाँ
अंजुमन-दर-अंजुमन तन्हाइयाँ तन्हाइयाँ

इश्क़ को हासिल हैं उन की भी करम-फ़रमाइयाँ
उम्र भर करते रहे हैं जो सितम-आराईयाँ

मिल के दोनों ने मुझे रुस्वा-ए-दुनिया कर दिया
कुछ मेरी नादानियाँ थीं कुछ तिरी दानाइयाँ

लफ़्ज़-ओ-मा'नी में उलझ कर रह गए अहबाब सब
काश कोई देख सकता क़ल्ब की गहराइयाँ

अब ख़ुलूस-ए-दिल की बातें ख़्वाब हो कर रह गईं
जिस तरफ़ देखो फ़क़त परछाइयाँ परछाइयाँ

कोई हँसता तो नहीं आँसू बहाने पर मिरे
बाइ'स-ए-तस्कीन-ए-ख़ातिर हैं मुझे तन्हाइयाँ

देखिए ये भी कि दिल का ख़ून होता तो नहीं
वज्ह-ए-रौनक़ ही सही ये अंजुमन-आराइयाँ

मेरी नज़रों ने उन्हें कुछ गुदगुदाया इस तरह
करवटें लेने लगीं सोई हुई अंगड़ाइयाँ

अहल-ए-दुनिया से शिकायत क्या गिला क्या रंज क्या
मुझ को ले डूबीं मिरे एहसास की गहराइयाँ

दर्द-ए-दिल जब तक न शामिल हो तो 'क़ादिर' शे'र क्या
ज़िंदगी भर करते रहिए क़ाफ़िया-पैमाइयाँ