उर्दू शायरी · ग़ज़ल

guzro na is tarah ki tamasha nahin hun main

गुज़रो न इस तरह कि तमाशा नहीं हूँ मैं

گزرو نہ اس طرح کہ تماشا نہیں ہوں میں

शायर: Obaidullah Aleem5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गुज़रो न इस तरह कि तमाशा नहीं हूँ मैं
समझो कि अब हूँ और दोबारा नहीं हूँ मैं

इक तब्अ' रंग रंग थी सो नज़्र-ए-गुल हुई
अब ये कि अपने साथ भी रहता नहीं हूँ मैं

तुम ने भी मेरे साथ उठाए हैं दुख बहुत
ख़ुश हूँ कि राह-ए-शौक़ में तन्हा नहीं हूँ मैं

पीछे न भाग वक़्त की ऐ ना-शनास धूप
सायों के दरमियान हूँ साया नहीं हूँ मैं

जो कुछ भी हूँ मैं अपनी ही सूरत में हूँ 'अलीम'
'ग़ालिब' नहीं हूँ 'मीर'-ओ-'यगाना' नहीं हूँ मैं