उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghar mein ek daricha kam hai

घर में एक दरीचा कम है

گھر میں ایک دریچہ کم ہے

शायर: Fahmi Badayuni8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

घर में एक दरीचा कम है
और उजाला कितना कम है

सिर्फ़ तुम्हारा चेहरा कम है
जाने घर में क्या क्या कम है

ख़ास नहीं है अपना जीना
इस जीने में मरना कम है

अब ये कहानी लम्बी चलेगी
इस में हमारा क़िस्सा कम है

सारे परिंदे चुप बैठे हैं
दश्त में इक दीवाना कम है

उस ने कहा अब जाओ यहाँ से
मैं ने कहा नज़राना कम है

उस की किताब-ए-दिल तो हसीं है
लेकिन पहला पन्ना कम है

सोते हुए सय्याद ये बोला
पिंजरे में इक चिड़िया कम है