उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghar ke zindan se use fursat mile to aae bhi

घर के ज़िंदाँ से उसे फ़ुर्सत मिले तो आए भी

گھر کے زنداں سے اسے فرصت ملے تو آئے بھی

शायर: Habib Jalib5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

घर के ज़िंदाँ से उसे फ़ुर्सत मिले तो आए भी
जाँ-फ़ज़ा बातों से आ के मेरा दिल बहलाए भी

लग के ज़िंदाँ की सलाख़ों से मुझे वो देख ले
कोई ये पैग़ाम मेरा उस तलक पहुँचाए भी

एक चेहरे को तरसती हैं निगाहें सुब्ह ओ शाम
ज़ौ-फ़िशाँ ख़ुर्शीद भी है चाँदनी के साए भी

सिसकियाँ लेती हवाएँ फिर रही हैं देर से
आँसुओं की रुत मिरे अब गुलसिताँ से जाए भी

रोज़ हँसता है सलीबों से उधर माह-ए-मुनीर
उस के पीछे कौन है वो छब मुझे दिखलाए भी