उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghazab hai ek but-e-kafir-ada ne luT liya

ग़ज़ब है इक बुत-ए-काफ़िर-अदा ने लूट लिया

غضب ہے اک بت کافر ادا نے لوٹ لیا

शायर: Qaisar Haideri Dehlvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़ज़ब है इक बुत-ए-काफ़िर-अदा ने लूट लिया
कि मुझ को बंदा बना कर ख़ुदा ने लूट लिया

ये किस की बज़्म में कम-बख़्त ले गईं नज़रें
निगाह-ए-नाज़ ने मारा हया ने लूट लिया

जो दिल के पास था सरमाया-ए-हवास-ओ-ख़िरद
नज़र ने छीन लिया और अदा ने लूट लिया

वो दिल कि जिस को बचाया था दैर-ओ-का'बा से
तुम्हारे हुस्न-ए-वरा-उल-वरा ने लूट लिया

नहिं नसीब जो ताज-ए-शही को भी 'क़ैसर'
मज़ा वो कासा-ए-दस्त-ए-गदा ने लूट लिया